EU सांसदों का कश्मीर दौरा प्लान करने वाली मादी शर्मा का मोदी कनेक्शन, सोशल मीडिया ने उठाए सवाल

MADI SHARMA MODI CONNECTION KASHMIR TRIP

नई दिल्ली

आज अचानक सोशल मीडिया में #MadiSharma हैशटैग ट्रेंड होते ही लोग इस बात के पीछे पड़ गए है कि कौन हैं  और क्या हैं ये मादी शर्मा। इनके बारे में सबसे ताजी जानकारी यह है कि मोदी सरकार ने जिन यूरोपीय सांसदों को कश्मीर के हालात जानने के लिए कश्मीर भेजा है, उन सांसदों को ईमेल करके मादी शर्मा नाम ने ही भारत दौरे और खासतौर से कश्मीर ले जाने का न्योता दिया था।

वैसे मादी शर्मा एक बिजनेस वुमेन हैं जो मादी ग्रुप की हेड हैं। उनके मादी ग्रुप के बारे में कहा जा रहा है कि यह कई अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट सेक्टर और एनजीओ का एक नेटवर्क है। मादी शर्मा एक NGO विमिंज इकनॉमिक ऐंड सोशल थिंक टैंक (WESTT) चलाती हैं। शर्मा के ट्विटर हैंडल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह खुद को ‘सोशल कैपिटलिस्ट: इंटरनैशनल बिजनस ब्रोकर, एजुकेशनल आंत्रप्रेन्योर ऐंड स्पीकर’ बताती हैं। मादी की वेबसाइट के मुताबिक WESTT महिलाओं का एक प्रमुख थिंक-टैंक है जिसकी वैश्विक पहुंच है। यह आर्थिक, पर्यावरणीय और महिलाओं के सामाजिक विकास पर फोकस करता है। इसमें लिखा है, ‘राजनीतिक स्तर पर यह कई मसलों पर जागरूकता के लिए लॉबिंग का भी काम करता है लेकिन कभी भी व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं।’

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यूरोपीय सांसदों को भेजे न्योते में मादी ने ही उन्हें पीएम मोदी के साथ खास मुलाकात कराने और कश्मीर ले जाने का वादा किया था। हमें जानकारी मिली है कि 7 अक्टूबर 2019 को मादी शर्मा ने यूरोपीय सांसदों को ईमेल कर 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीआईपी मीटिंग कराने और 29 अक्टूबर को कश्मीर ले जाने का वादा किया था। सोशल मीडिया ने उनकी इस पहल को ग्रीन सिग्नल देने पर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

भारतीय मीडिया में यह खबर सामने आने के बाद अब मादी शर्मा के बारे में जानने की लोगों में उत्सुकता बढ़ी है।

 

मादी शर्मा की इस पहल के बाद EU टीम के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से नई दिल्ली में मुलाकात की। इसके बाद वे मंगलवार को श्रीनगर में 15वीं कोर के कमांडर से भी मिले। नई दिल्ली में डोभाल द्वारा आयोजित लंच के दौरान कश्मीर के कुछ लोगों से भी उनकी मुलाकात कराई गई थी। ऐसे ही श्रीनगर में भी उनकी कुछ स्थानीय लोगों से मुलाकात हुई।

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मादी शर्मा यूरोपियन इकनॉमिक ऐंड सोशल कमिटी की सदस्य भी हैं, जो यूरोपियन यूनियन की एक सलाहकार संस्था है। उन्होंने 370 पर एक आर्टिकल भी लिखा था। लेख का शीर्षक था, ‘आर्टिकल 370 को खत्म करना जीत और कश्मीरी महिलाओं के लिए चुनौती क्यों है। उन्होंने पिछले साल ऐसा ही एक यूरोपीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मालदीव भेजने में सहयोग किया था। उस समय तत्कालीन यामीन सरकार के लिए काफी मुश्किल दौर था।

बहरहाल, मादी शर्मा के इस पहल के बाद यूरोपीयन यूनियन के सांसदों का कश्मीर दौरा तो संपन्न हो गया , पर सरकार के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि तमाम तरह  के तैरते सवालों का माकूल जवाब कैसे दे। विपक्ष उस पर आरोप लगाता रहा है कि विपक्ष के सांसदों को कब  कश्मीर के हालात के जायजा लेने को बिना रोक टोक के जाने की अनुमति मिलेगी।